विद्यासागरजी बोले- मोक्ष मार्ग की चाह से मन इतना प्रसन्न रहता है कि उसके आगे कल्पवृक्ष भी मायने नहीं रखता

होशंगाबादआचार्य विद्यासागरजी ने जिले में पैदल विहार के दौरान बुधवार को कहा- जबलपुर के पास बरगी है। वहां पुण्य सलिला नर्मदा नदी पर बांध बना है। जहां बांध बन जाता है वहां पानी अधिक हो जाता है। इधर, देखो नर्मदा खाली-खाली दिखती है। जब कभी अधिक वर्षा हो जाए तो बांध पानी से भर जाता है। उस समय आवाज आती है, दरवाजा खोल दो।

बारिश में बांध से छोड़ा गया पानी जब नर्मदा में आता है तो होशंगाबाद वाले कहते हैं, पहले इतना संग्रह क्यों किया? अब एक साथ पानी छोड़ोगे तो होशंगाबाद को खतरा हो जाएगा। इसलिए हम देखते हैं छोटे-बड़े गांवों में परिग्रह का ज्यादा संग्रह नहीं किया जाता। वहां हमेशा दरवाजा खुला रहता है। इसलिए तो उन्हें सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र का लाभ भी पास से मिल रहा है। हजारों किलोमीटर दूर रहने वालों को नहीं मिल पाता, पुण्य सलिला का जितना फायदा आप लोगों को एक-डेढ़ घंटे में ही मिल जाता है। सिद्धोदय क्षेत्र नेमावर का कार्य पूर्ण होने वाला है।

हम भी होशंगाबाद कितनी बार आएं पता नहीं। यह आगमन चौथी बार है। एकाध बार और आना होगा। चातुर्मास की माला फेरना नहीं छोड़ना। तभी कार्यसिद्ध होगा। मैं सोचता हूं प्रकृति से नर्मदा लबालब है। उस पर बहुत सारे बांध भी बने। यहीं से बहकर तो वह कच्छ होते हुए गुजरात में गई है। इससे गुजरात चमन हो गया है। यह आपकी उदारता का ही प्रतिफल है। आप चमन होते जाओ। यह भी है स्वार्थ त्याग की कठिन तपस्या..। वस्तुत: ज्यादा लोभ करना ही नहीं। लोभ करो तो उसी का करो जो मोक्ष मार्ग में आपके लिए साधन सामग्री का काम करे। जो कुछ भी उपलब्ध है, उसमें संतुष्ट होना है। आगे तो बस मोक्षमार्ग की चाह है। उसी चाह से सांसारिक चाह कम होती जाती है। एक दिन सांसारिक चाह से मुक्त होकर व्यक्ति हमेशा-हमेशा प्रसन्न चित्त रहता है। इस प्रसन्नता के आगे चिंतामणि कल्पवृक्ष भी कुछ मायने नहीं रखता। यह बहुत दुर्लभ होता है। आपको यह संयोग मिला है। पूर्व में कोई विशेष पुण्य किया होगा। उसी का फल है। 

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