मध्यप्रदेश में तीर्थ दर्शन योजना को लाल झंडी, दो सौ करोड़ का बजट छह करोड़ में सिमटा

भोपाल। शिवराज सरकार की छवि निखारने में अहम भूमिका निभाने वाली ‘तीर्थ दर्शन योजना” के पहिए थम गए हैं। वर्ष 2018 के बजट में बुजुर्ग और दिव्यांगों को तीर्थ कराने के लिए भाजपा सरकार ने दो सौ करोड़ रुपए खर्च किए थे, लेकिन सरकार बदलने के बाद मात्र छह करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

कमलनाथ सरकार ने इस साल प्रयागराज में कुंभ के दौरान प्रदेश के चार शहरों से तीर्थ दर्शन ट्रेन चलाई, लेकिन उसके बाद से कोई ट्रेन नहीं चली। आर्थिक तंगी और किसान कर्जमाफी के लिए रकम का इंतजाम करने के लिए सरकार पिछली सरकार की तीर्थदर्शन जैसी कई योजनाओं के बजट में कटौती कर चुकी है।

नहीं होगी चारधाम यात्रा

बद्रीनाथ, रामेश्वरम्, द्वारकाधाम और जगन्न्ाथपुरी जैसे तीर्थ की चारधाम यात्रा अब सरकारी खर्च पर नहीं हो पाएगी। दरअसल 3 सितंबर 2012 से तत्कालीन शिवराज सरकार ने यह योजना 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए शुरू की थी।

2013 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को इस योजना का भारी लाभ मिला था। इस मुफ्त तीर्थ यात्रा का लाभ सिर्फ उन लोगों के लिए था, जो करदाता नहीं हैं। योजना की लोकप्रियता देखकर छत्तीसगढ़ सरकार ने भी ‘तीरथ बरत” नामक योजना शुरू की थी। केंद्र सरकार ने भी ‘प्रवासी भारतीय तीर्थदर्शन योजना” प्रारंभ की है।

अब तक सात सौ करोड़ खर्च

तीर्थ दर्शन योजना पर राज्य सरकार पिछले आठ साल में सवा 700 करोड़ रुपए खर्च कर सात लाख से अधिक बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा करा चुकी है। धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग द्वारा संचालित इस योजना के तहत हर धर्म के तीर्थ स्थानों के लिए विशेष ट्रेन चलाई जा रही थी।

अब तक हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णोदेवी, शिर्डी, गया, काशी, अमृतसर, तिरुपति, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला वेलगणि चर्च (नागपट्टम), गंगासागर कामाख्या देवी, गिरनारजी, पटना साहिब, उज्जैन, चित्रकूट, महेश्वर सहित अजमेर शरीफ के लिए सात लाख 26 हजार लोगों को तीर्थ यात्रा का लाभ सरकार दिला चुकी है।

सिर्फ छह ट्रेन चली इस साल

कमलनाथ सरकार के वजूद में आने के बाद मात्र छह ट्रेन चलाई गईं। खासतौर से प्रयागराज में आयोजित कुंभ के दौरान सरकार ने चार शहरों से तीर्थयात्रियों को कुंभ स्नान के लिए भेजा था। हरदा, गुना, जबलपुर और बुरहानपुर से चार ट्रेन प्रयागराज के लिए चलाई गई थीं। ट्रेन में जाने वाले तीर्थ यात्रियों को भोजन, बीमा, उपचार सहित सारी सुविधाएं सरकारी खर्च पर मुहैया कराई जाती हैं। सूत्रों का मानना है कि जुलाई में एक ट्रेन चलाई जा सकती है। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

वर्षट्रेनयात्रीराशि (करोड़ रुपए में)

2012-13– 82 — 83,000– 56

2013-14– 98 — 98,000 — 75

2014-15 — 75 –75,600 –83

2015-16 — 90 — 90,800 — 102

2016-17 — 111 — 1,12,000 — 127

2017-18 — 139 — 1,40,000 — 165

2018-19 — 131 — 1,34,000 — 160

हमारी तैयारी पूरी

हमारी पूरी तैयारी है। सरकार बजट देगी तो हम तत्काल ट्रेन चला देंगे। 

केके सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, आईआरसीटीसी भोपाल

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