4 महीने बाद मन की बात में बोले मोदी- जब जन-जन जुड़ेगा, तब पानी बचेगा

नई दिल्ली। जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार रात भारत लौट आए। रविवार करीब चार महीने के बाद मोदी ने मन की बात की। वह लोकसभा चुनाव की व्यस्तताओं के बीच लगभग चार महीने तक लोगों से संवाद नहीं कर सके थे।
यह उनके दूसरे कार्यकाल का पहला ‘मन की बात’ कार्यक्रम है। इस दौरान मोदी ने कहा- एक लंबे अंतराल के बाद आपके बीच #MannKiBaat, जन-जन की बात, जन-मन की बात इसका हम सिलसिला जारी कर रहे हैं। चुनाव की आपाधापी में व्यस्तता तो ज्यादा थी लेकिन मन की बात का मजा ही गायब था, एक कमी महसूस कर रहा था। हम 130 करोड़ देशवासियों के स्वजन के रूप में बातें करते थे।
बीते समय में जब मन की बात कार्यक्रम नहीं हो रहा था, तो रविवार को ऐसा लगता था कि कुछ छूट गया है। जब मैं ‘मन की बात’ करता हूं, तो बोलता भले मैं हूं, शब्द शायद मेरे हैं, आवाज मेरी है, लेकिन कथा आपकी है, पुरुषार्थ आपका है, पराक्रम आपका है।
मन की बात कार्यक्रम में जीवन्तता थी, अपनापन था, मन का लगाव था, दिलों का जुड़ाव था और इसके कारण बीच का जो समय गया, वो समय बहुत कठिन लगा मुझे। देश और समाज के लिए आईने की तरह है। ये हमें बताता है कि देशवासियों के भीतर अंदरूनी मजबूती, ताकत और टैलेंट की कोई कमी नहीं है।
संदेश बहुत आते हैं, शिकायतें कम होती हैं
मन की बात में चिट्ठियां और संदेश बहुत आते हैं, लेकिन शिकायत बहुत कम आती हैं। देश के करोड़ों लोगों की भावनाएं कितनी ऊंची हैं इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि देश के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने के बाद भी लोग अपने लिए कुछ नहीं मांगते।
जब चुनाव से पहले मैंने कहा था कि चुनाव के बाद फिर ‘मन की बात’ में फिर मिलेंगे, तो लोग कहते थे मोदी को इतना भरोसा कैसे है? यह भरोसा मेरा नहीं आप लोगों का था। दरअसल, मैं वापस आया नहीं हूं, बल्कि आप लोग मुझे वापस लाए हैं।
जब भारत में आपातकाल लगाया गया तो उसका विरोध सिर्फ राजनीतिक दायरे में ही नहीं किया गया, राजनेताओं तक सीमित नहीं रहा था, आंदोलन में सिमट नहीं गया था बल्कि जन-जन के दिल में एक आक्रोश था। खोए हुए लोकतंत्र की एक तड़प थी। आपातकाल में देश के हर नागरिक को लगने लगा था कि उसका कुछ छीन लिया गया था।
हाल ही में हुआ चुनाव सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव
2019 का लोकसभा का चुनाव अब तक के इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था। भारत गर्व के साथ कह सकता है कि हमारे लिए कानून नियमों से परे लोकतंत्र हमारे संस्कार हैं। लोकतंत्र हमारी संस्कृति है, लोकतंत्र हमारी विरासत है। और आपातकाल में हमने अनुभव किया था और इसीलिए देश, अपने लिए नहीं, लोकतंत्र की रक्षा के लिए आहुत कर चुका था।
आप कल्पना कर सकते हैं कि इस प्रकार के चुनाव संपन्न कराने में कितने बड़े स्तर पर संसाधनों की और मानवशक्ति की आवश्यकता हुई होगी। लाखों कर्मियों की दिन-रात की मेहनत से चुनाव संपन्न हो सका। सैन्य कर्मियों ने भी परिश्रम की पराकाष्ठा की।
अरुणाचल प्रदेश के एक रिमोट इलाके में, महज एक महिला मतदाता के लिए पोलिंग स्टेशन बनाया गया। आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि चुनाव आयोग के अधिकारियों को वहाँ पहुँचने के लिए दो-दो दिन तक यात्रा करनी पड़ी – यही तो लोकतंत्र का सच्चा सम्मान है।
दुनिया में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर स्थित मतदान केंद्र भी भारत में ही है। यह मतदान केंद्र हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्फिति क्षेत्र में 15000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मैं चुनाव आयोग को, और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को, बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और भारत के जागरूक मतदाताओं को नमन करता हूं।
मैं चुनाव आयोग को, और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को, बहुत-बहुत बधाई देता हूं और भारत के जागरूक मतदाताओं को नमन करता हूं। 2019 का लोकसभा चुनाव अब तक के इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था। लाखों शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की दिन-रात मेहनत की वजह से यह संभव हो सका है।
बनाया गया जल शक्ति मंत्रालय
मेरे प्यारे देशवासियों, मुझे इस बात की खुशी है कि हमारे देश के लोग उन मुद्दों के बारे में सोच रहे हैं, जो न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य के लिए भी बड़ी चुनौती है। जो भी पोरबंदर के कीर्ति मंदिर जाएं, वो उस पानी के टांके को जरुर देखें। 200 साल पुराने उस टांके में आज भी पानी है और बरसात के पानी को रोकने की व्यवस्था है, ऐसे कई प्रकार के प्रयोग हर जगह पर होंगे।
जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए देश में नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है। इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेजी से फैसले लिए जा सकेंगे। मेरा पहला अनुरोध है – जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। आइए, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें।
देशवासियों से मेरा दूसरा अनुरोध है। हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं। मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को share करने का आग्रह करता हूं।
जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों, स्वयं सेवी संस्थाओं और इस क्षेत्र में काम करने वाले हर किसी का, उनकी जो जानकारी हो, उसे आप #JanShakti4JalShakti के साथ शेयर करें ताकि उनका एक डाटाबेस बनाया जा सके।
पारस का रूप है पानी
पानी की महत्ता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा- पानी पारस का रूप है। पानी की एक-एक बूंद को बचाने के लिए हमें प्रयास करना चाहिए। फिल्म जगत, मीडिया, कथा-कीर्तन करने वाले लोग सभी अपने-अपने तरीके से पानी को बचाने के लिए अभियान चलाएं। मोदी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
योग दिवस के लिए भी जताया आभार
मेरे प्यारे देशवासियो, मुझे और एक बात के लिए भी आपका और दुनिया के लोगों का आभार व्यक्त करना है। 21 जून को फिर से एक बार योग दिवस में उमंग के साथ, एक-एक परिवार के तीन-तीन चार-चार पीढ़ियां, एक साथ आ करके योग दिवस को मनाया।
शायद ही कोई जगह ऐसी होगी, जहां इंसान हो और योग के साथ जुड़ा हुआ न हो। इतना बड़ा योग ने रूप ले लिया है। योग के क्षेत्र में योगदान के लिए Prime Minister’s Awards की घोषणा अपने आप में मेरे लिए एक बड़े संतोष की बात थी। यह पुरस्कार दुनिया भर के कई संगठनों को दिया गया है।
बता दें कि इस साल फरवरी में पीएम मोदी ने आखिरी मन की बात कार्यक्रम किया था। पहले कार्यकाल में पीएम मोदी ने 53 बार मासिक कार्यक्रम के जरिए राष्ट्र को संबोधित किया था। रेडियो पर प्रसारित होने वाला यह कार्यक्रम महीने के आखिरी रविवार को प्रसारित किया जाता है। इसके लिए लोगों से सुझाव और विचार आमंत्रित किए जाते हैं।

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