MP में सवर्ण आरक्षण को मंजूरी, भोपाल-इंदौर मेट्रो रेल के लिए होगा MOU

भोपाल। प्रदेश सरकार ने आखिरकार दस फीसदी सवर्ण आरक्षण को लागू करने का फैसला कर लिया। इसका लाभ सरकारी नौकरी और शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश पर मिलेगा। वहीं, भोपाल-इंदौर मेट्रो रेल परियोजना को गति देने के लिए त्रिपक्षीय एमओयू किया जाएगा। 2023 तक पहली लाइन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
बार लाइसेंस व्यवस्था में सुधार करते हुए तय किया गया है कि 25 कमरे से कम होने पर लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। पूल, टेरेस या बगीचे में शराब पिलाने के लिए अब दस फीसदी अतिरिक्त कर देना होगा। वर्ष 2019-20 के लिए बजट भी कैबिनेट में प्रस्तुत किया गया। यह दस जुलाई को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश होगा। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा, वाणिज्यिक कर मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर और नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह ने कैबिनेट के बाद फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि कई विधेयकों को विधानसभा में प्रस्तुत करने की अनुमति भी दी गई है।
आठ लाख सालाना आय के साथ बंजर भूमि वालों को भी पात्रता
जनसंपर्क मंत्री ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (सवर्ण) को सरकारी नौकरी और शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए मध्यप्रदेश में दस प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। सभी तरह से आठ लाख रुपए सालाना आय वालों को इस आरक्षण की पात्रता होगी।
इसी तरह नगर निगम क्षेत्र में 12 सौ वर्गफीट का मकान/फ्लैट, नगर पालिका क्षेत्र में 15 सौ और नगर पंचायत परिषद में 18 सौ वर्गफीट से ज्यादा का मकान/फ्लैट होने पर पात्रता नहीं होगी। ग्रामीण क्षेत्र में इसकी कोई सीमा नहीं रहेगी। पांच एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए। इसमें बंजर, बीहड़, पथरीली जमीन शामिल नहीं है। खसरे में बीते तीन साल में यदि जमीन बंजर, बीहड़, पथरीली के तौर पर दर्ज है तो ऐसे व्यक्तियों को पात्रता होगी। केंद्र सरकार ने एक हजार वर्गफीट का प्रावधान रखा था।
2023 तक पहली मेट्रो लाइन शुरू करेंगे
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने त्रिपक्षीय समझौता करने की अनुमति दे दी है, यह केंद्र सरकार, राज्य सरकार और मेट्रो रेल कंपनी के बीच होगा। भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत 6 हजार 900 करोड़ और इंदौर की 7 हजार 500 करोड़ रुपए होगी। लागत का 20 प्रतिशत हिस्सा राज्य, 20 प्रतिशत केंद्र और 60 प्रतिशत हिस्सा कर्ज के माध्यम से लगाया जाएगा। भोपाल मेट्रो के लिए 3 हजार 493 करोड़ रुपए का कर्ज यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक से लिया जाएगा।
वहीं, इंदौर मेट्रो परियोजना के लिए एडीबी और एनडीबी से 3 हजार 200 करोड़ रुपए लिए जाएंगे। यह कर्ज 20 साल के लिए होगा। राज्य सरकार जो कर्ज लेगी, वो बजट उत्तरदायित्व एवं प्रबंधन अधिनियम के दायरे से बाहर रहेगा। भोपाल में एक लाइन एम्स से भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल (करोंद) तक तो दूसरी रत्नागिरी तिराहे से भदभदा तक रहेगी। 2023 तक पहली मेट्रो रेल लाइन शुरू करने का लक्ष्य है।
पूल, टेरेस या बगीचे में शराब पिलाने पर लगेगा दस फीसदी अतिरिक्त कर
वाणिज्यिककर मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि बार लाइसेंस व्यवस्था को व्यावहारिक बनाते हुए नए प्रावधान किए गए हैं। देखने में आया है कि होटल बार रेस्टोरेंट में अंदर बैठाकर शराब पिलाने का नियम है, लेकिन टेरेस, पूल या बगीचे में भी शराब परोसी जाती है।
इस व्यवस्था को 15 फीसदी अतिरिक्त कर लेकर अनुमति दे दी जाएगी। अभी दस कमरे के ऊपर होने पर लाइसेंस देने का प्रावधान है, लेकिन नए होटल बार लाइसेंस के लिए होटल में कम से कम 25 कमरे होना अनिवार्य हैं। इसमें भी 15 एसी वाले होने चाहिए। दस सामान्य भी चल जाएंगे। एक कमरा 150 वर्गफीट का होना अनिवार्य है।
अभयारण्य के अंदर दस किलोमीटर की परिधि में होटल, रिसॉर्ट खोलना चाहते हैं या टेंट लगाकर व्यवस्था शुरू करना चाहते हैं तो इसकी सुविधा दी जाएगी। वन क्षेत्र में सौ वर्गफीट के पांच एसी कमरे की जगह दस का प्रावधान किया है। बार लाइसेंस होने पर अनुमति विभाग से यदि सात दिन के भीतर नहीं मिलती है तो यह स्वत: ही मान ली जाएगी। बार संचालकों को एक निश्चित दुकान से शराब लेने की बाध्यता नहीं रहेगी। मांग के हिसाब से यदि ब्रांड नहीं मिलता है तो वो विभाग के वेयरहाउस से ले सकता है।
होटल बार रेस्टोरेंट में तो अभी जीएसटी लगता है, लेकिन कमरों में यह शामिल नहीं है। अब इसे भी जीएसटी के दायरे में लाया गया है। रिसॉर्ट बार लाइसेंस के लिए अलग से बार की अनिवार्यता अब नहीं होगी। एक से अधिक तल पर रेस्टोरेंट बार चलाने पर प्रत्येक अतिरिक्त बार के लिए दस प्रतिशत अधिक लाइसेंस फीस देनी होगी। बार लाइसेंस के लिए मदिरा की निर्धारित धारण क्षमता में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
10 जुलाई को पेश होगा बजट
विधानसभा के मानसून सत्र में दस जुलाई को वर्ष 2019-20 का बजट प्रस्तुत होगा। कैबिनेट में बुधवार को इसका प्रस्तुतिकरण किया गया। सूत्रों के मुताबिक सभी विभागों के बजट में वृद्धि की गई है। आम आदमी पर कर का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। कर्जमाफी के लिए जरूरत के हिसाब से राशि रखी गई है तो युवा, सामाजिक कल्याण, अधोसंरचना विकास सहित गांव, गरीब और रोजगार के मद्देनजर वित्तीय इंतजाम किए गए हैं।

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