कैबिनेट की बैठक में सिंधिया समर्थक मंत्रियों का बवाल, सीएम से बहस

पांसे ने कहा मंत्रियों से- क्या सीएम से ऐसे करते है बात?
भोपाल। मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार कैबिनेट की बैठक में मंत्री और मुख्यमंत्री आपस में उलझ गए। ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्री प्रद्युमन सिंह की सीएम कमलनाथ से बहस हो गई। यह जो हुआ यह पहली बार देखा गया जिसे देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। मंत्रियों के विभागों में हस्तक्षेप न करने की बात को लेकर यह बहस शुरू हुई और सिंधिया समर्थक मंत्रियों ने एक स्वर में अपने तेवर दिखाए। कैबिनेट की मर्यादा को तोड़ते हुए मंत्री प्रद्युमन सिंह ने तीखे स्वर में कहा सुनिये सीएम साहब, ऐसे नहीं चलेगा। इसके जवाब में सीएम कमलनाथ भी बोले मैं सब जानता हूं किसके कहने पर कर रहे हो। वहीं मुख्यमंत्री की तरफ से मंत्री सुखदेव पांसे ने मंत्रियों को डांट लगाई और कहा कि क्या ऐसे बात की जाती है मुख्यमंत्री से? वहीं सिंधिया समर्थक मंत्री प्रद्युमन सिंह के समर्थन में आ गए। विपक्ष के हमले से परेशान सरकार में अब अपने ही मंत्रियों को साधना मुश्किल हो रहा है, वहीं मंत्री भी अपना आपा खोते हुए सीधे मुख्यमंत्री को निशाने पर ले रहे हैं। बता दें कि मंत्रिमंडल विस्तार और कई मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने की भनक लगते ही हाल ही में सिंधिया समर्थक मंत्रियों ने एक बैठक की थी, जिसमे रणनीति बनी थी। जिसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला भी टल गया। मंत्रिमंडल से बाहर किये जाने की असुरक्षा की भावना से बैठकों का दौर शुरू हुआ और आज कैबिनेट में जमकर बवाल हुआ। इससे पहले जब सिंधिया एवं दिग्विजय सिंह समर्थक 2-2 मंत्रियों से इस्तीफा लिए जाने की अटकलें जब शुरू हुई तो सिंधिया समर्थक मंत्री सक्रिय हो गए और दिल्ली में सिंधिया के साथ बैठक की। दिल्ली के बाद भोपाल में मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया के आवास पर सिंधिया समर्थक मंत्रियों की बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक बैठक के बाद जो चर्चा बाहर निकलकर आई उसके अनुसार सिंधिया समर्थक मंत्रियों ने तय कर लिया है कि अगर किसी एक से इस्तीफा मांगा जाता है तो सभी इस्तीफा दे देंगे। अब यह बात जब मुख्यमंत्री के पास पहुंची तो वह फिलहाल मामले को शांत करने एवं विरोध को ठंडा करने में जुट गए हैं। इस बीच कैबिनेट में मंत्रियों की भड़ास खुलकर सामने आ गई और सीएम के साथ मंत्रियों की बहस से प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
सीएम के सबसे करीबी है पांसे
मध्य प्रदेश केबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ अमर्यादित व्यवहार करने वाले मंत्री के खिलाफ जिस तेवर से मंत्री सुखदेव पांसे ने उन्हें मर्यादा का पाठ पढ़ाया और मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा का एहसास कराया उससे एक बार फिर यह साबित हो गया कि सुखदेव पांसे मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र करीबी और चहेते तो है ही साथ ही साथ वे परिस्थितियों को समझ कर त्वरित निर्णय लेने और अपने नेता के सम्मान में किसी भी हद तक जाने के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं। केबिनेट की बैठक में सिंधिया समर्थक मंत्री द्वारा मुख्यमंत्री से किए गए आपत्तिजनक व्यवहार के पलटवार में कमलनाथ के कट्टर समर्थक और प्रदेश के पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे ने मोर्चा संभालते हुए मंत्रियों को तल्ख लहजे में कहा कि क्या मुख्यमंत्री से ऐसे बात की जाती है? उल्लेखनीय है कि केबिनेट की बैठक में सिंधिया समर्थक मंत्री प्रदुम्न सिंह ने मर्यादा तोड़ते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ से अमर्यादित लहजे में बात की थी। जिस पर श्री पांसे ने तत्काल प्रतिक्रिया करते हुए लगभग फटकारने वाले अंदाज में कहा कि क्या मुख्यमंत्री से इस तरह बात की जाती है? जिसके बाद बैठक में सन्नाटा छा गया। इस घटनाक्रम ने एक बार यह फिर साबित कर दिया है कि सुखदेव पांसे मुख्यमंत्री कमलनाथ के चहेते होने के साथ-साथ सबसे विश्वासपात्र और करीबी भी है। पांसे ने भी राजनीति में आते ही कमलनाथ को अपना गॉड फादर माना था और भले ही कितनी भी राजनैतिक परिस्थितियां बदली हो उन्होंने कभी भी कमलनाथ का दामन नहीं छोड़ा। जिसका प्रतिफल भी श्री पांसे को हर बार मिला। चाहे बैतूल जिले की कांग्रेस राजनीति में वर्चस्व और नियुक्तियों की बात हो, चाहे लोकसभा उपचुनाव लड़ाने की बात हो, चाहे तमाम विरोधों के बावजूद विधानसभा टिकिट देने की बात हो? कमलनाथ ने हर बार सुखदेव पांसे को एक नंबर पर रखा और सार्वजनिक संदेश दिया कि सुखदेव पांसे ही उनका सबसे विश्वासपात्र और करीबी है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद श्री पांसे को कमलनाथ ने भारी भरकम पीएचई मंत्रालय का मंत्री भी बनाया साथ ही अपने गृह जिले छिंदवाड़ा और करीबी जिले सिवनी का प्रभारी मंत्री भी बनाया। पांसे ने भी जब-जब मौका आया कमलनाथ के प्रति अपनी निष्ठा का सार्वजनिक प्रदर्शन भी किया। केबिनेट की बैठक में हुए घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सुखदेव पांसे, कमलनाथ के सबसे भरोसेमंद और करीबी है।

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